???? Khabari News | चकिया‚चंदौली | रिपोर्टर: आशु पंडित
✍️ Editor-in-Chief: के.सी. श्रीवास्तव (Advocate)
???? 6 हो चुके हैं तेंदुए | 16 जून को पूरी हुई गणना | वन्यजीव प्रेमियों में उत्साह | जंगल का रोमांच बढ़ा
????चंद्रप्रभा वन्य जीव अभ्यारण्य से जुड़ी दिल दहला देने वाली, दिल को छू लेने वाली और जंगल की धड़कनों को फिर से जिंदा कर देने वाली ये विशेष रिपोर्ट “खबरी न्यूज” पर सबसे पहले…



???? जंगल की वापसी: जंगल में फिर गूंज रही है बाघिन की पदचाप!
विंध्य की तलहटी में फैले चंद्रप्रभा वन्य जीव अभ्यारण्य से एक सुखद और रोमांचक खबर आई है – अब यहां तेंदुओं की संख्या बढ़कर 6 हो चुकी है!
जो अभ्यारण्य कुछ वर्षों पहले एक मौन जंगल में बदलता जा रहा था, वहां अब फिर से शिकारी तेंदुओं की वापसी से जंगल की आत्मा लौटती दिख रही है।
16 जून 2025 को समाप्त हुई ताजा वन्य जीव गणना के अनुसार, अब चंद्रप्रभा की वादियों में 6 तेंदुए, 274 चिंकारा, 205 भालू, 308 चीतल, 206 सांभर, 581 जंगली सुअर, 16 भेड़िए, 188 साही और 301 मोर तक गिनती में आए हैं।
???? चंद्रप्रभा: सिर्फ जंगल नहीं, एक जीवित इतिहास है!
1957 में स्थापित यह अभ्यारण्य केवल जीव-जंतुओं का बसेरा नहीं, बल्कि भारतीय जैव विविधता की धरोहर है। इसका नाम चंद्रप्रभा नदी से लिया गया है, जिसका अर्थ है “चाँद की चमक”।
यह वही इलाका है, जहां कभी काशी राज दिवोदास धन्वंतरि के समय से दुर्लभ वनस्पतियाँ आयुर्वेद की जड़ों में शामिल होती रही हैं।
यह जंगल छोटी-छोटी पहाड़ियों, आदिकालीन गुफाओं और सैकड़ों वर्षों पुराने घाटियों से भरा है। इसे देखना सिर्फ प्रकृति को देखना नहीं है, बल्कि इतिहास को छूना है।

???? 1958 की ऐतिहासिक कोशिश: जब शेर आए थे चंद्रप्रभा
1958 में गुजरात के गिर जंगल से 2 शेरनी और 1 शेर को लाकर इस अभ्यारण्य में छोड़ा गया था।
1969 तक इनकी संख्या 11 तक पहुँच गई थी। लेकिन समय, निगरानी की कमी और अनुकूल वातावरण के अभाव में ये शेर विलुप्त हो गए।
अब सवाल ये है: क्या फिर लौट पाएगा चंद्रप्रभा में ‘शेरों का साम्राज्य’…?
???? ट्रैप कैमरों की कहानी: तकनीक जो बोलती थी… फिर चुप हो गई!
2009 में वन विभाग ने यहां चार बड़े ट्रैप कैमरे लगाए थे ताकि वन्य जीवों की हर हरकत दर्ज की जा सके।
शुरुआत में ये कैमरे कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ देते रहे, लेकिन बाद में ये निष्क्रिय हो गए।
क्या 2025 में फिर से तकनीक को जिंदा किया जाएगा?
???? वन्यजीव गणना: कैसे होती है जंगल की जनगणना?
वन विभाग के अनुसार गणना केवल आंखों से नहीं होती – यह एक अनुभव, धैर्य और वैज्ञानिक पद्धति का मिश्रण होती है।
वन कर्मी पगडंडियों, जल स्रोतों, गुफाओं, बीट के निशानों, आवाज़ों, मल-मूत्र आदि के माध्यम से प्राणी की उपस्थिति और संख्या का अनुमान लगाते हैं।
वन क्षेत्राधिकारी अखिलेश दूबे बताते हैं:
“हर कदम पर हम प्रकृति की सांसों को सुनते हैं, पदचिन्हों को पढ़ते हैं, और जंगल की नब्ज़ को महसूस करते हैं।”
???? आज की गिनती, जंगल की ताक़त का संकेत:
बीटवार वन्य जीव गणना की रिपोर्ट (2025):
| प्रजाति | संख्या |
|---|---|
| तेंदुआ | 6 |
| चिंकारा | 274 |
| वनरोज | 357 |
| सांभर | 206 |
| चीतल | 308 |
| भालू | 205 |
| जंगली सूअर | 581 |
| बंदर | 1016 |
| लंगूर | 712 |
| भेड़िया | 16 |
| लकड़बग्घा | 156 |
| लोमड़ी | 225 |
| सियार | 363 |
| मोर | 301 |
| साही | 188 |
| गोह | 213 |
???? वन्यजीव संरक्षण की चुनौती और उम्मीदें:
तेंदुओं की संख्या बढ़ना कोई साधारण बात नहीं – यह दर्शाता है कि पर्यावरण अब धीरे-धीरे पुनर्जीवित हो रहा है।
लेकिन ये सफलता स्थायी तब होगी जब:
- जंगल की निगरानी तकनीकी रूप से और मज़बूत की जाए
- शिकारियों पर सख्त निगरानी हो
- वन क्षेत्र को बाहरी दखल से मुक्त रखा जाए
- ट्रैप कैमरों को पुनः क्रियाशील किया जाए
???? स्थानीय ग्रामीणों की जुबानी:
???? “अब रात में जंगल से तेंदुए की गुर्राहट सुनाई देती है… डर भी है, पर गर्व भी है!” — रामचंदर यादव, हिनउत घाट
???? “मोरों की टेर, सांभर की छलांग, और अब तेंदुए की आहट… जंगल जिंदा हो गया है!” — शांति देवी, जयमोहनी
???? क्यों है ये खबर खास?
???? क्योंकि यह संकेत है कि हमने प्रकृति को थोड़ी जगह दी, और उसने फिर से साँस लेना शुरू किया।
???? क्योंकि यह साबित करता है कि जैव विविधता का संरक्षण संभव है।
???? क्योंकि यह सिर्फ खबर नहीं – जंगल की आत्मा का पुनर्जन्म है।
???? (फोटो कैप्शन):
चंद्रप्रभा अभ्यारण्य में खुले मैदान में विचरण करता चिंकारा – जंगल की नाज़ुक लेकिन मजबूत कड़ी
(फाइल फोटो)
???? Khabari News की अपील:
???? यदि आप भी चाहते हैं कि चंद्रप्रभा का हर कोना फिर से जीवंत हो…
???? अगर आप चाहते हैं कि अगली पीढ़ी भी इन तेंदुओं, मोरों और चिंकारों को देख सके…
तो कृपया जंगल को माँ समझें, शिकारियों की सूचना दें, कचरा ना फैलाएं, और वन विभाग का साथ दें।
???? Khabari News | चकिया | रिपोर्टर: आशु पंडित
✍️ Editor-in-Chief: के.सी. श्रीवास्तव (Advocate)
???? “जहां खबर बने, वहीं से उठे खबरी की आवाज़!”



