???? रिपोर्ट: चंदौली, उत्तर प्रदेश | संवाददाता विशेष: खबरी टीम
???? दिनांक: 22 मई 2025
???? जहाँ उम्मीद की जानी थी, वहीं हो गया जीवन का अंतिम अध्याय
“लक्ष्य” – एक मासूम, नन्हा, मुस्कुराता हुआ चेहरा, जिसकी हँसी पूरे घर को रोशन करती थी। पर आज वही घर सन्नाटे में डूबा है। माँ की गोद ख़ाली है, और पिता की आँखों से आँसू थमने का नाम नहीं ले रहे। सात महीने के इस नन्हे फ़रिश्ते को जो दर्द झेलना पड़ा, वो एक पूरे सिस्टम की नाकामी और निजी अस्पतालों की मुनाफ़ाखोरी की खौफ़नाक तस्वीर पेश करता है।




???? शुरुआत अस्पताल से नहीं, मौत की ओर धकेलने से हुई थी…
18 मई 2025 को, कृष्णानंद पांडेय अपने बेटे को लेकर मुगलसराय के आदित्री अस्पताल पहुँचे। वहाँ तैनात डॉक्टर रितेश सिंह ने बिना किसी टेस्ट के दवा देना शुरू कर दिया। कोई नई रिपोर्ट नहीं, कोई जांच नहीं — केवल “अंदाज” में इलाज। बच्चा भर्ती था, लेकिन डॉक्टर की निगरानी में नहीं, बल्कि मौत की ओर।
❌ डॉक्टर या मौत का सौदागर?
कृष्णानंद बताते हैं, “डॉ. रितेश सिंह का नाम अस्पताल के दस्तावेज़ों में कहीं नहीं था। न वो ऑफ़िशियली रजिस्टर्ड हैं, न अस्पताल के स्टाफ में शामिल। फिर भी उन्होंने हमारे बेटे को देखना शुरू किया – किस हक़ से?”
इसी बीच, 19 मई की सुबह, लक्ष्य की हालत बिगड़ने लगी। माता-पिता घबराकर डॉक्टर से बार-बार गुहार लगाते रहे, पर जवाब में मिला तो केवल बहस, अहंकार और ज़िद कि “बच्चा ठीक है, कहीं और मत ले जाइए।”
???? ज़बरदस्ती बाहर लाना पड़ा, पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी…
जब हालात बेहद ख़राब हो गए, तो पांडेय दंपत्ति बच्चे को प्रज्ञा अस्पताल, वाराणसी ले गए। वहाँ के डॉक्टरों ने तुरंत कहा – “मामला बहुत गंभीर है, शायद ज़्यादा समय नहीं है।” और कुछ ही मिनटों में, लक्ष्य इस दुनिया को अलविदा कह गया।
अब सोचिए – अगर समय पर सही इलाज मिला होता? अगर सही डॉक्टर होता? अगर एक ईमानदार सिस्टम होता? क्या ये मौत टाली नहीं जा सकती थी?
???? पुलिस से न्याय नहीं, केवल पल्ला झाड़ना मिला
21 मई को जब परिजन मुगलसराय थाने पहुँचे, तो FIR दर्ज करने से मना कर दिया गया। पुलिस का तर्क था – “शव नहीं है, तो केस नहीं बनता।” जैसे बच्चा कोई दस्तावेज़ था, कोई वस्तु था – जिसकी बिना गवाही के इंसाफ़ नहीं होता।
उल्टे, उन्हें CMO कार्यालय भेजा गया, जहाँ अब तक केवल “देखेंगे” वाला आश्वासन है। इस बीच आरोपी डॉक्टर आराम से अपनी प्रैक्टिस में व्यस्त हैं – बिना डर, बिना अफ़सोस।
???? कहानी यहीं नहीं रुकती – ये पूरे सिस्टम का पोस्टमार्टम है
???? क्या आदित्री अस्पताल के पास रजिस्ट्रेशन है?
???? क्या वहाँ बिना कागज़ात के इलाज हो सकता है?
???? क्या डॉ. रितेश सिंह मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत हैं?
???? क्या बिना चेकअप के इलाज देना योग्य डॉक्टर का काम है?
इन सभी सवालों पर शासन, स्वास्थ्य विभाग और न्यायपालिका को जवाब देना चाहिए।
???? Khabari News की माँग:
- डॉ. रितेश सिंह की तुरंत गिरफ्तारी और लाइसेंस की जाँच
- आदित्री अस्पताल की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जाँच
- मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से कार्रवाई और जवाबदेही तय करना
- कृष्णानंद परिवार को न्याय दिलाना – ताकि कोई और लक्ष्य न खोए
???? जब एक माँ की गोद सूनी होती है, तब संविधान की आत्मा काँपती है…
यह सिर्फ एक मामला नहीं, एक आंदोलन की शुरुआत है। हर माता-पिता, हर नागरिक को उठना होगा, बोलना होगा – क्योंकि कल शायद ये हादसा आपके साथ हो।
“डॉक्टर ने नहीं मारा, सिस्टम की चुप्पी ने मारा… अस्पताल ने नहीं लूटा, हमारे विश्वास को लूटा।”
???? Khabari News आपके साथ है – जब तक लक्ष्य के लिए न्याय नहीं मिलता, यह स्टोरी रुकेगी नहीं।
✍️ रिपोर्ट: खबरी न्यूज टीम | सम्पादकीय मार्गदर्शन: K.C. Shrivastava (Adv.)




