

✍️ Khabari News | विशेष संवाददाता | नौगढ़ (चंदौली)
नौगढ़ तहसील मुख्यालय पर शुक्रवार का दिन इतिहास में दर्ज हो गया।
गोंड जाति के सैकड़ों ग्रामीण जब झुलसती धूप में लहुराडीह, परसिया, बोझ और विशेषरपुर जैसे गांवों से ट्रैक्टर-ट्रॉली, जीप और पैदल काफिले में तहसील पहुंचे, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह दिन इतना तनावपूर्ण और उग्र हो जाएगा।
????️ आक्रोश की गूंज: “न्याय चाहिए – प्रमाण पत्र दो”
तहसील के गेट पर भीड़ जमा हुई और नारे गूंजने लगे –
???? “जाति प्रमाण पत्र दो, बच्चों का भविष्य बचाओ!”
???? “कागज पूरे, फिर भी क्यों अधूरी फाइल?”
???? “गोंड समाज के साथ भेदभाव बंद करो!”
भीड़ में महिलाएं सबसे आगे थीं। उनके आंसुओं और आवाज़ की गूंज ने माहौल और भी गंभीर बना दिया। उनका कहना था – “हम महीनों से तहसील का चक्कर काट रहे हैं, बच्चों की पढ़ाई रुक गई है, छात्रवृत्ति अटक गई है, नौकरी का सपना टूट रहा है, लेकिन सरकार और अधिकारी सिर्फ कागजों का खेल खेल रहे हैं।”



????️ तहसीलदार का घेराव – दरवाजा तोड़ने की कोशिश
आक्रोश इतना बढ़ा कि प्रदर्शनकारियों ने तहसीलदार अनुराग सिंह का घेराव कर लिया। भीड़ के दबाव में वह किसी तरह अपने कक्ष में घुसकर बच सके। इसी बीच तहसील कार्यालय का गेट तोड़ने की कोशिश हुई और लेखपालों के साथ झड़प भी हो गई।
स्थिति इतनी बिगड़ गई कि तहसील का मेन गेट घंटों तक बंद रखना पड़ा। वादकारी लोग, जो अपने काम के लिए आए थे, उन्हें भी धूप में गेट के बाहर खड़ा रहना पड़ा।
???? “भेदभाव से बर्बाद हो रहा भविष्य” – महिलाओं की दहाड़
गांव की महिलाएं सबसे ज्यादा मुखर दिखीं। एक महिला ने कहा –
“हमारे बच्चों का भविष्य प्रशासन ने बर्बाद कर दिया है। पहले प्रमाण पत्र दिए गए, अब रोक लगा दी। आखिर हमारी गलती क्या है? हम गोंड समाज के लोग कब तक अपने हक से वंचित रहेंगे?”
दूसरी महिला बोली –
“हम गरीब हैं, मजदूरी करते हैं, पढ़ाई कराने का सपना है। लेकिन बिना जाति प्रमाण पत्र के बच्चा छात्रवृत्ति से वंचित है, सरकारी नौकरी से वंचित है। ये अन्याय कब तक चलेगा?”
???? हालात बिगड़े – पुलिस और PAC की तैनाती
लगभग दो घंटे तक तहसील परिसर में हंगामा चलता रहा। हालात बेकाबू होते देख नौगढ़, चकरघट्टा और चकिया थानों की पुलिस के साथ PAC फोर्स मौके पर बुलानी पड़ी।
तनावपूर्ण माहौल के बीच प्रशासन ने सुरक्षा घेरा बना लिया।

???? विधायक कैलाश खरवार का हस्तक्षेप
जैसे ही मामले की जानकारी चकिया विधायक कैलाश खरवार को मिली, उन्होंने फोन पर SDM नौगढ़ विकास मित्तल से बात की और समस्या का समाधान निकालने का निर्देश दिया।
????️ SDM नौगढ़ का बयान
SDM नौगढ़, विकास मित्तल ने कहा –
???? “शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही जाति प्रमाण पत्र जारी होंगे। सभी निर्धारित संलग्नक पूरे करने वालों को प्रमाण पत्र मिलेगा। किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा।”
???? नेताओं की मध्यस्थता – आक्रोश शांत हुआ
इस बीच भाजपा मंडल अध्यक्ष भगवानदास अग्रहरि और ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि सुजीत सिंह (सुड्डू) मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से संवाद किया। काफी समझाने-बुझाने और अधिकारियों से वार्ता के बाद भीड़ धीरे-धीरे शांत हुई।
???? आंदोलन के पीछे की जड़
ग्रामीणों का कहना है कि –
- पहले गोंड जाति को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र तहसील से जारी किया गया।
- लगभग 300 लोगों को पहले ही प्रमाण पत्र मिल चुका है।
- अब अचानक रोक लगा दी गई।
- महीनों से आवेदन और सभी कागज जमा करने के बावजूद फाइल “लंबित” बताई जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह साफ भेदभाव है। इस रोक से बच्चों की छात्रवृत्ति, पढ़ाई और सरकारी नौकरी की संभावनाएं खत्म हो रही हैं।
???? लहरों की तरह उठा गुस्सा
गांव से आए काफिलों में बुजुर्ग, युवा, महिलाएं और बच्चे सभी थे। गुस्से की लहरें इतनी प्रबल थीं कि हर चेहरा संघर्ष का प्रतीक लग रहा था।
भीड़ ने न सिर्फ प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद की, बल्कि यह साफ संदेश दिया कि – “अब चुप्पी नहीं, हक की लड़ाई लड़ी जाएगी।”
???? सवालों के घेरे में प्रशासन
- जब पहले प्रमाण पत्र जारी किए गए थे, तो अब रोक क्यों?
- जिन लोगों की फाइलें पूरी हैं, उन्हें क्यों टालमटोल किया जा रहा है?
- क्या गोंड समाज को सुनियोजित तरीके से हक से वंचित किया जा रहा है?
????️ संघर्ष और उम्मीद
करीब तीन घंटे तक चले हंगामे के बाद, प्रशासन और नेताओं की मध्यस्थता से भीड़ शांत हुई। लेकिन ग्रामीणों की आंखों में संघर्ष की चिंगारी और न्याय की उम्मीद अभी भी साफ झलक रही थी।
उन्होंने साफ कहा –
“अगर जल्द समाधान नहीं मिला तो यह आंदोलन और बड़ा होगा।”
✍️ Khabari News की टिप्पणी
यह सिर्फ एक प्रमाण पत्र का सवाल नहीं है। यह सवाल है – गरीब समाज के बच्चों के भविष्य का, उनकी पढ़ाई का, उनकी नौकरी का और उनके सम्मान का।
जब शासन-प्रशासन जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता, तो आक्रोश फूटता है। नौगढ़ तहसील का यह हंगामा उसी दर्द का प्रतीक है।
???? प्रशासन को अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि कार्रवाई करनी होगी।
???? गोंड समाज के बच्चों को उनका हक दिलाना ही असली न्याय होगा।
???? लेखक: Khabari News टीम (Editor-in-Chief K.C. Shrivastava, Advocate)
???? स्थान: नौगढ़, चंदौली




