खबरी न्यूज नेशनल न्यूज नेटवर्क चकिया‚चन्दौली।
कभी-कभी ज़िंदगी ऐसे मोड़ पर लाती है जहाँ विदाई का आलम सिर्फ़ विदाई नहीं होता, बल्कि एक भावनात्मक भूचाल बन जाता है। आज चकिया कोतवाली का माहौल कुछ ऐसा ही था।
लोगों की आंखें नम, दिल भारी, और होंठों पर सिर्फ़ एक ही नाम – दीवान राकेश यादव।



???? कर्तव्य की राह पर चलते-चलते…
राकेश यादव सिर्फ़ एक पुलिसकर्मी नहीं थे, वे अपने कर्तव्य को ईश्वर का आदेश मानते थे।
चंदौली जिले के तमाम थानों में उन्होंने अपनी ईमानदारी, तत्परता और संवेदनशीलता की ऐसी मिसाल पेश की कि लोग उन्हें सिर्फ़ पुलिस वाला नहीं, बल्कि अपना अपना भाई, साथी और मददगार मानने लगे।
आज जब वे चकिया कोतवाली से आज़मगढ़ जिले के लिए रवाना हुए, तो पूरा थाना ही नहीं बल्कि आम लोग भी इस सोच में डूब गए कि –
“क्या सच में राकेश जी चले गए…? क्या अब किसी परेशानी में हम सबसे पहले इन्हें याद नहीं कर पाएंगे?”

???? विदाई का शानो-शौकत से भरा पल
प्रभारी निरीक्षक अर्जुन सिंह के नेतृत्व में यह विदाई कुछ ऐसी रही मानो परिवार का कोई सदस्य सफर पर निकल रहा हो।
- मिठाई का वितरण हुआ,
- गजरे पहनाए गए,
- और सभी साथियों ने उन्हें दिल से शुभकामनाएं दीं।
लेकिन इस पूरे माहौल में एक अनकहा दर्द छिपा था।
कुछ साथी हंसते-हंसते कह बैठे –
“भइया… आप बताते भी नहीं और चुपचाप हमें छोड़कर चले जा रहे हैं?”
उन शब्दों में मजाक कम और टीस ज्यादा थी।
???? “जो आता है, उसे जाना ही होता है” – वृक्ष बंधु डॉ. परशुराम सिंह
इस मौके पर जब मशहूर पर्यावरणविद् डॉ. परशुराम सिंह (वृक्ष बंधु) ने कहा –
“यह तो दस्तूर है कि जो आता है, उसे जाना ही होता है”
तो पूरा माहौल और भावुक हो गया।
उनके इस वाक्य में सच्चाई तो थी, लेकिन दर्द भी साफ झलक रहा था।
???? “हमारे होनहार जवान थे” – प्रभारी निरीक्षक अर्जुन सिंह
विदाई के इस मौके पर प्रभारी निरीक्षक अर्जुन सिंह ने कहा –
“राकेश यादव जी हमारे कोतवाली के होनहार जवान थे। यदि कुछ और लोग इनके जैसे होते, तो चौकी पर किसी और की जरूरत ही नहीं पड़ती।”
उन्होंने आगे कहा कि –
“इनके जाने से जो कमी हुई है, उसकी पूर्ति जल्द नहीं हो पाएगी।”
उनकी बातों से साफ समझा जा सकता था कि यह विदाई सिर्फ़ औपचारिक नहीं, बल्कि दिल की गहराई से निकला आशीर्वाद और दुख दोनों थी।

???? कौन-कौन रहा मौजूद?
इस मौके पर विभागीय परिवार भी अपने साथी को विदा करने पहुंचा।
- हेड मुहर्रिर राकेश राय,
- पियुष खान,
- राकेश सिंह
सहित कई लोग मौजूद रहे और सबकी आंखों में गौरव और ग़म दोनों साफ झलक रहा था।
???? विदाई या सस्पेंस…?
विदाई के इस पल में एक बड़ा सवाल सभी के दिल में चुपचाप गूंज रहा था –
“क्या आज़मगढ़ जाकर भी राकेश यादव वैसे ही लोगों के दिलों पर राज करेंगे जैसे चंदौली में किया?”
सस्पेंस यही है कि एक जिला भले छूट गया हो, लेकिन उनके कार्य और व्यक्तित्व की छाप हमेशा के लिए चकिया कोतवाली और चंदौली की यादों में दर्ज हो गई है।
???? विदाई के आँसू, यादों का कारवां
लोग जब-जब चकिया कोतवाली की गलियों से गुजरेंगे,
जब-जब कोई पुलिस वाला लोगों की मदद के लिए खड़ा होगा,
तो राकेश यादव का नाम ज़रूर याद आएगा।
क्योंकि यह विदाई केवल एक कर्मचारी की विदाई नहीं थी,
यह कर्तव्य, ईमानदारी और मानवीय संवेदनाओं की विदाई थी।
???? खबरी न्यूज़ ,एडिटर इन चीफ के०सी० श्रीवास्तव की कलम से
विदाई का ये पल हमें यही सिखाता है कि –
जो कर्तव्यनिष्ठ होता है, वह कहीं भी चला जाए, उसकी पहचान, उसकी ईमानदारी और उसकी यादें हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहती हैं।
राकेश यादव जैसे कर्मचारी किसी भी जिले की शान और पहचान होते हैं।
उनका यह सफर भले नया हो, लेकिन चंदौली और चकिया के लिए वे हमेशा अपनों के अपने रहेंगे।
???? खबरी न्यूज़ इस भावुक विदाई पर यही कहेगा –
???? “कर्तव्य निभाने वाले कभी विदा नहीं होते, वे सिर्फ़ जगह बदलते हैं… यादें हमेशा वही रहती हैं।”
✍️ खबरी न्यूज़ | चकिया | विशेष रिपोर्ट






