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???? 1 से 7 जुलाई | ???? उत्तर प्रदेश
???? केसी श्रीवास्तव एडवोकेट (एडिटर इन चीफ, खबरी न्यूज़)
????️ विशेष अतिथि: डॉ. परशुराम सिंह (बृक्ष बंधु, ग्रीन वॉरियर्स, शिकागो यूनिवर्सिटी)
उत्तर प्रदेश में इस वर्ष वन महोत्सव को लेकर ज़बरदस्त तैयारियां हैं। सरकार ने ऐलान किया है कि 1 से 7 जुलाई के बीच पूरे प्रदेश में 35 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। कुल 2586 पौधशालाओं में 52.43 करोड़ पौधे तैयार हैं। एक्सप्रेसवे के किनारे ढाई लाख पौधरोपण होगा।
लेकिन असली सवाल वही है जो हर साल रह जाता है – “बचते कितने हैं?”
इस विशेष बातचीत में खबरी न्यूज़ के एडिटर इन चीफ के0सी0 श्रीवास्तव एडवोकेट ने इस सवाल को सीधे सामने रखा डॉ. परशुराम सिंह, जिन्हें ‘बृक्ष बंधु’ के नाम से जाना जाता है और जो खुद लाखों पौधे लगा चुके हैं, से। आइए पढ़ते हैं उस बातचीत की बेबाक झलक:
???? आमने-सामने: बृक्षारोपण के आंकड़े बनाम असलियत
खबरी: डॉ. साहब, सबसे पहले तो नमस्कार और वन महोत्सव 2025 के मौके पर समय देने के लिए धन्यवाद। आप वर्षों से वृक्षारोपण कर रहे हैं। आप ही बताइए, सरकार लाखों-करोड़ों पौधे लगवाती है, लेकिन बचते कितने हैं?
परशुराम सिंह (मुस्कुराते हुए): नमस्कार श्रीवास्तव जी। आपने एकदम नब्ज पर हाथ रखा है। हम लाखों पौधे लगाते हैं, मैं खुद अब तक लगभग 2 लाख से ज्यादा पौधे लगा चुका हूँ – स्कूलों, पंचायतों, श्मशान भूमि, सड़क किनारे। लेकिन जो सच्चाई है, वह यह कि इनमें से लगभग 35% ही ज़िंदा बचे हैं।
खबरी: यानी 65% मर जाते हैं?
परशुराम सिंह: बिल्कुल। मरते नहीं, मारे जाते हैं – अनदेखी से, पानी की कमी से, जिम्मेदारी के अभाव से।
खबरी: आपने खुद पौधे लगाए हैं। लेकिन आपने कभी सरकार से पूछा कि इतने पौधे लगाने के बाद भी हरियाली क्यों नहीं दिखती?
परशुराम सिंह: सरकार के पास प्लान है – लेकिन follow-up नहीं है। सिर्फ ‘उद्घाटन’ नहीं, ‘पालन’ होना चाहिए। मैंने खुद कई बार सुझाव दिया कि हर पौधे को एक संस्था या व्यक्ति ‘गोद’ ले। यह सिर्फ Plantation नहीं, Adoption होना चाहिए।
खबरी: चंदौली की बात करें तो यहां 15 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य है। आपने इस जिले में क्या अनुभव किया?
परशुराम सिंह: चंदौली में जनसहयोग बढ़ा है। नौबतपुर हो या बहरनी,या फिर चकिया वहां के बच्चों ने खुद मुझे फोन करके कहा – “परशुराम अंकल, स्कूल में आकर पौधे लगाइए।” यह एक बड़ी उम्मीद है। लेकिन प्रशासन को यह तय करना होगा कि जो लगाया गया है, वह बचे।
खबरी: क्या आप मानते हैं कि बृक्षारोपण अब इवेंट बन गया है?
परशुराम सिंह: हां, और दुख की बात है कि इवेंट से इमोशन गायब है। कैमरा चलता है, फावड़ा चलता है, पौधा लगता है – और फिर सब भूल जाते हैं। यह बृक्ष नहीं, बस ‘डेटा’ पैदा कर रहा है।
खबरी: बिहार से आपने तुलना की थी…
परशुराम सिंह: जी। बिहार में ‘हर घर एक पेड़’ योजना के तहत पंचायत स्तर पर निगरानी होती है। वहां डिजिटल ट्रैकिंग तक हो रही है। उत्तर प्रदेश को अब “हर पौधा, एक ज़िम्मेदार” की नीति अपनानी होगी।
???? बृक्ष बंधु का डेटा:
- कुल लगाए गए पौधे (2005-2024): 2,00,000+
- जीवित बचे पौधे: लगभग 70‚000
- बृक्ष मित्र बनाए गए: 1,800 स्कूल छात्र
- अपनाए गए गाँव: 40+
???? खबरी का विश्लेषण: आंकड़ों से आगे की सोच
- कुल लगाए गए पौधे (2024): 35 करोड़
- संभावित बचने वाले (34% Rate): 11.9 करोड़
- बर्बाद संसाधन: पौध, श्रम, पानी और बजट
???? प्रश्न जो आज भी सवाल बनकर खडे है और देखे क्या उत्तर मिलते है
- क्या वन महोत्सव के बाद भी पौधों की निगरानी होती है?
- उत्तर: वर्तमान में यह निगरानी सीमित है। कुछ जिलों में ‘ग्रीन वॉच’ समितियां बनी हैं, लेकिन इनकी सक्रियता पूरे वर्ष नहीं रहती। डिजिटल ट्रैकिंग की व्यवस्था अधिकांश जगहों पर नहीं है।
- क्या ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव को जिम्मेदारी दी गई?
- उत्तर: कुछ जिलों में ग्राम प्रधानों को पौधों की सुरक्षा की मौखिक जिम्मेदारी दी गई है, परंतु इसके लिए स्पष्ट लिखित दायित्व और फंडिंग का अभाव है। Accountability तय नहीं होती।
- क्या स्कूलों ने ‘My Tree’ नाम से कोई अभियान शुरू किया?
- उत्तर: अभी बहुत कम स्कूलों में इस तरह की पहल हुई है। हालांकि, कुछ निजी विद्यालयों और NGOs ने अपने स्तर पर ‘My Tree’ जैसी गतिविधियां चलाई हैं। यह मॉडल राज्यस्तर पर अपनाया जाना चाहिए।
- क्या CSR कंपनियों ने पौधों की देखरेख को फंड किया?
- उत्तर: कुछ कॉर्पोरेट कंपनियों ने हाईवे ग्रीनिंग प्रोजेक्ट्स में सहयोग किया है, लेकिन गाँवों और विद्यालयों में CSR फंडिंग अभी न के बराबर है। इसमें बड़ी संभावना है।
- क्या मीडिया सिर्फ पहले दिन की फोटो ले रहा या साल भर ट्रैक करेगा?
- उत्तर: अधिकांश मीडिया संस्थान पहले दिन के फोटो और बाइट तक सीमित हैं। बहुत कम संस्थान ऐसे हैं जो पूरे वर्ष फॉलोअप रिपोर्टिंग करते हैं। खबरी न्यूज़ इस पर अलग काम कर रहा है।
✅ समाधान: डॉ. परशुराम सिंह के सुझाव
- Tree Adoption Drive: हर छात्र-छात्रा कम से कम एक पौधे को साल भर संभाले
- Quarterly Audit: हर 3 महीने पौधों की फोटो GPS टैगिंग के साथ अपलोड हो
- Water Bank: जल संकट वाले क्षेत्रों में सिंचाई के लिए वर्षा जल संचयन
- Eco Clubs: हर गांव व स्कूल में पर्यावरण क्लब अनिवार्य हो
???? सामाजिक पहल के लिए Reels और अभियान विचार:
- बच्चों द्वारा लगाए गए पौधों के साथ “मेरे बृक्ष की कहानी”
- QR Code के जरिए पौधे की जानकारी, लगानी की तारीख और देखरेख करने वाले का नाम
- #PlantToProtect चैलेंज
- हर महीने “ग्राम वृक्ष अवॉर्ड” का आयोजन
वन महोत्सव 2025 एक अभियान है – लेकिन इसे अभियान से आस्था बनाना होगा। जब तक हर नागरिक, हर छात्र, हर ग्रामवासी इसे निजी जिम्मेदारी नहीं मानेगा, तब तक हरियाली सिर्फ आंकड़ों में ही मुस्कराएगी।
खबरी न्यूज़ व बृक्ष बंधु मिलकर यह संदेश दे रहे हैं:
“पौधा लगाओ ज़रूर, पर निभाओ भी। वरना ये हरियाली सिर्फ तुम्हारे सोशल मीडिया प्रोफाइल तक सीमित रह जाएगी।”
???? रिपोर्ट: खबरी स्पेशल टीम, चंदौली से ???? संपादन: केसी श्रीवास्तव एडवोकेट ???? परामर्श: डॉ. परशुराम सिंह



